Saturday, August 10, 2024

Kuch pal esse bhi the

 कुछ पल ऐसे भी थे जब आँसू रुक ही नहीं रहे थे,

माँ ही थी अकेली जिसने इस दर्द को समझा था।

पूछा था कि अगर तू बोले तो सारी उमर,

तुझे ऐसे ही रहने दूँ...


मन तो भर आया था पर फिर नज़र,

मेरे पापा और भाई आए।

नज़र आया तो बस मायूस चेहरे...


कुछ पल ऐसे भी थे जब मैंने खुद से पूछा,

क्या मैं जिंदगी भर सब को रुलाऊँगी?

फिर बस आँसू रुक से गए।


पता था कुछ सही नहीं है पर मुस्कुरा,

कर आगे चल दिए।

फिर कभी आँसू नहीं बहे...


सन्नाटा सा था, कुछ भी सही नहीं था,

पर हम सबसे हँसके मिल लिए।

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